राज-ए-उल्फत. ....❤
कुछ लोग तो इसे कितना बदनाम कर चुके हैं ...
तो कुछ कर रहे हैं. ...
कुछ जान दे कर भी साबित न कर के..जालिम सोच के सामने..
तो कुछ जिस्म और रुह मे ही उलझे हुए हैं. ...
कुछ उलझे है अपनी ही बनी बनाई प्यार की कहानियाँ मे.....
कुछ खुद को कुर्बान कर रहे हैं मुहोब्बत की खुबसूरत गलियों मे.....
कुछ लोगो ने मजाक बना दिया है इश्क का.... !
तो कही यह इश्क सभी रिश्तो कि जरुरत सा हैं ....
कुछ धोखेबाजी को भी प्यार कह चले हैं ...
कुछ लोग अपनी जिंदगी अपनों के लिए जी चले हैं. ........
कोइ दिलसे किसी का होना चाहता हैं. ...
तो कोइ सिर्फ किसी को लुभाना चाहता हैं ....
कैसी चाहतो मे यह उल्फते उलझी हुई हैं .....
कही सब कुछ खुशहाल हैं. ....
तो कही हैरान दिलजले घूम रहे हैं ...
हर कोई सच्चा आशिक बनना चाह रहा हैं. ...
कहानिया उल्फतो कि..सब देख रहे हैं ...
कोई सिर्फ़ इन्सानो के प्यार को समझते हैं ....
वे प्यार को भी हिस्सो मे बांट चले हैं. ....
तो कोई प्यार कि मिसाले बन चले हैं. ...
शायद उल्फतों कि बात ही अलग हैं. ..
अलगही भाषा है ...खुद के दिलसे शुरू होकर जिंदगी तक...यह अलगसा सफर हैं. ...
यह मुहोब्बत ताउम्र एक सच्चा साथ है शायद....
जो इन्सान को जिंदगी से भी ज्यादा कुछ दे जाता हैं. .....
एक दुसरे को और सभी को जोड़े रखता हैं ......
रिश्ते तो सबकी जिंदगी मे कई सारे हैं ....
लेकिन प्यार गुमनाम है शायद अपने ही दिलमें...
राज-ए-उल्फत तभी तो खास हैं. ...!
-@कुणाल विजय ठाकरे.

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